क्रिकेट के खेल में बारिश हमेशा से एक अनचाहा खलनायक रही है। सीमित ओवरों के क्रिकेट (ODI और T20) में जब मैच के बीच में मौसम बिगड़ता है, तो मैच का फैसला करने या नया टारगेट तय करने के लिए जिस गणितीय प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है, उसे DLS Method (Duckworth-Lewis-Stern Method) कहा जाता है।
अक्सर फैंस के मन में यह सवाल उठता है कि जब पहली टीम 50 ओवर में 300 रन बनाती है, तो 20 ओवर में विपक्षी टीम को 150 के बजाय 175 या 180 का लक्ष्य क्यों मिलता है? आइए इस विस्तृत गाइड में बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि डकवर्थ-लुईस नियम क्या है, यह कैसे काम करता है और इसके पीछे का फॉर्मूला क्या है।
Contents
1. DLS नियम की जरूरत क्यों पड़ी? (1992 का ऐतिहासिक विवाद)
1990 के दशक से पहले बारिश से बाधित मैचों में “मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स” (Most Productive Overs Rule) या रन-रेट नियम लागू होता था। लेकिन 1992 के वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में इसका सबसे भयानक और हास्यास्पद नतीजा देखा गया।
दक्षिण अफ्रीका बनाम इंग्लैंड मैच में दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 13 गेंदों में 22 रनों की जरूरत थी। बारिश आई और जब मैच दोबारा शुरू हुआ, तो पुराने नियम के तहत लक्ष्य को 1 गेंद में 21 रन कर दिया गया, जो किसी भी टीम के लिए असंभव था। इस विवाद के बाद दुनिया भर में एक वैज्ञानिक और निष्पक्ष नियम की मांग उठी।
2. DLS का आविष्कार और इतिहास
इस समस्या को हल करने के लिए दो ब्रिटिश सांख्यिकीविदों — फ्रैंक डकवर्थ (Frank Duckworth) और टोनी लुईस (Tony Lewis) ने एक फॉर्मूला तैयार किया, जिसे 1997 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस्तेमाल किया गया और 1999 में ICC ने आधिकारिक रूप से अपनाया।
बाद में 2014 में ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर स्टीवन स्टर्न (Steven Stern) ने आधुनिक T20 क्रिकेट और बढ़ते स्कोरिंग रेट्स के अनुसार इस फॉर्मूले को अपडेट किया, जिसके बाद इसका नाम बदलकर DLS (Duckworth-Lewis-Stern) Method कर दिया गया।
3. DLS नियम कैसे काम करता है? (The Concept of Resources)
DLS प्रणाली का पूरा आधार एक शब्द पर टिका है — संसाधन (Resources)। क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाजी टीम के पास दो प्रमुख संसाधन होते हैं:
- शेष ओवर (Overs Remaining): जितने ओवर खेलने के लिए बचे हैं।
- हाथ में बचे विकेट (Wickets in Hand): कुल 10 विकेट।
पारी की शुरुआत में (50 ओवर और 10 विकेट) टीम के पास 100% संसाधन होते हैं। जैसे-जैसे ओवर खत्म होते हैं या विकेट गिरते हैं, टीम के संसाधनों का प्रतिशत कम होता जाता है।
| बचे हुए ओवर | 0 विकेट खोकर Resource % | 2 विकेट खोकर Resource % | 5 विकेट खोकर Resource % | 8 विकेट खोकर Resource % |
|---|---|---|---|---|
| 50 ओवर | 100.0% | 83.8% | 49.5% | 20.3% |
| 40 ओवर | 89.3% | 77.6% | 47.6% | 20.1% |
| 30 ओवर | 75.1% | 67.3% | 44.1% | 19.7% |
| 20 ओवर | 56.6% | 52.4% | 37.6% | 18.5% |
| 10 ओवर | 32.1% | 30.8% | 25.5% | 15.4% |
4. DLS का बुनियादी गणितीय फॉर्मूला
जब दूसरी पारी में बारिश के कारण ओवर घटते हैं, तो नया टारगेट निकालने का बुनियादी फॉर्मूला इस प्रकार होता है:
अगर दूसरी टीम के पास संसाधनों का अनुपात पहली टीम से ज्यादा होता है, तो टारगेट बढ़ जाता है; अगर संसाधन कम होते हैं, तो टारगेट घट जाता है।
5. पार स्कोर (Par Score) क्या होता है?
मैच के दौरान स्क्रीन पर दिखने वाला DLS Par Score वह स्कोर होता है, जो लक्ष्य का पीछा कर रही टीम को उस ओवर और गिरे हुए विकेटों के हिसाब से मैच बराबरी पर रखने के लिए चाहिए होता है। अगर उस पल बारिश से मैच हमेशा के लिए रुक जाए, तो टीम अगर पार स्कोर से 1 रन आगे है तो वह जीत जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. DLS का पूरा नाम क्या है?
DLS का फुल फॉर्म Duckworth-Lewis-Stern Method (डकवर्थ-लुईस-स्टर्न मेथड) है।
Q2. T20 और वनडे में DLS लागू होने के लिए कम से कम कितने ओवर जरूरी हैं?
T20 इंटरनेशनल में मैच का नतीजा निकालने के लिए दोनों टीमों द्वारा कम से कम 5-5 ओवर और वनडे इंटरनेशनल में कम से कम 20-20 ओवर खेला जाना अनिवार्य है।
Q3. क्या DLS में टारगेट बढ़ भी सकता है?
हाँ! अगर पहली पारी में बारिश के कारण मैच रुकता है और ओवर कटते हैं, तो दूसरी टीम को ज्यादा आक्रामक बल्लेबाजी का मौका मिलता है, इसलिए उनका टारगेट मूल स्कोर से बढ़ जाता है।
